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इंडियन मसालों का जादू

इंडियन मसालों का जादू मसाले वही मसाले वही हमारी जरीबूटिया जिनको लेने के लिए अग्रेंज इतने दूर आये और भारत को गुलाम बनाया वही मसलोंकी एहमियत हम भूल गए ! हम इंडियन स्पाइस के हेल्थ सीक्रिट भूल गए है ! इंडियन मसाले अपने आप मै एक बहूत बड़ी औषधि(medicine) है ! जो हर इंडियन किचन मै पाए जाते है ! सिर्फ उसको लेने का सही तरीका मालूम होना चाईये फ़िर ओ एक औषधि जैसेही कम  करते है ! भारत मै प्राचीन समय से ही मसलों का उपयोग सिर्फ स्वाद के लिए नहीं , बल्कि स्वास्थ्य के लिए भि किया जाता है !  दुनियका सबसे बेहतरीन दवाखाना हमारी रसोई है ! मसाले शुद्ध होने चाईये तभी ओ अपना असर दिखते है तभी ओ मसाले दावाई की तरह कम  करते है ! दालचीनी (cinnamon) दालचीनी अपने ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है अगर आपका ब्लड प्रेशर लो है तो उसको स्टेबलाईस करता है ! आपके ब्लड शुगर को भि स्टेबलैस करता है ! आपके डीबीटीस लेवल को भि काफी जादा बैलन्स करता है  ये अॅंटी ऑक्सीडेंट होता है जो आपकी बॉडी पे बहूत अच्छे से कम  करता है ! आपको ब्रीथ करने मै मदत करता है अपको सोचने मै मदत  करता है ! ये अॅंटी बॅकटीरियाल होता है ! बॉडी मै जोभि इनफेक्शन  होती है उसको खतम करता है ! जिनको भि सासों मै बतधू होती है कफ होते है या पायरिया होता है उसको दालचीनी स्टीक चबा के खानी  चाईये ! अर्थराइटिक्स के पेशंट इसको टी बनके पिना चाईये !  जिसको कॉलस्टोरल या ट्रायघिसरीं हो जाती है उसको कंट्रोल करने मै दालचीनी बहूत अछा होता है इसीलिए दालचीनी वेटलॉस मे बहूत अच्छी  चीज है ! डिप्रेशन हो किसी भि तरिकेका या फ़िर अपको हार्मोनल डिस्बलैस हो एसे सिच्वेशन मै दालचीनी अपको लाइफ सवेर का कम  करती है ! अगर आपको माईग्रेन है तो इसका टी पिना या इसको पवडर माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक हो जाता है ! दालचीनी असीडीटी को कंट्रोल होती है ! लेकिन इसको लेने का सही तरीका मालूम होना चाईये ! दालचीनी मै काफी सारे अंतर होते है ! दालचीनी एक ताना से निकलती है डाल यानि पेड़ का तन और चीनी मतलाभ शक्कर इसीलिए दालचीनी मीठा होता है ! इंडिया मे जो दालचीनी मिलती है ओ बहुत जादा बड़ी होती है उसमे ऑइल की मात्र जादा होती है क्योंकि ओ सबसे ऊपर की लेआर होती है उसके बाद जो नीचे की लेयर होती है उसमे ऑइल की मात्र कम  होती है और ओ बहुत जादा पतली होती है ! हल्दी (turmeric ) अथरातीस मे हल्दी बहुत फाइदा देता है सिर्फ खाने से नहीं बल्कि उसको लगनेसे जॉइन्ट का दर्द कम हो जाता है ! इसके अलावा हार्ड बन को कम  कर देता है ! जॉन्ट पैन मे बहुत फायदा करता है ! पेट मे जादा पानी  हो जाता है जबभी आपको बलोटींग हो जाती है या फिर असीडीटी बहुत जादा बढ़ जाती है या आपको बेचेनी महसूस होती है तब आप गरम पानी के साथ एक चुटकी हल्दी लेते है तो आपको बहुत आराम मिलता है , बेचेनई कम हो जाती है ! ब्लोटिंग की वजह से भूख नहीं लगती उनके लिए हल्दी बहुत अच्छी  होता है ! आपके लीवर के लिए बहुत अच्छी  होता है जिनको फैटी लीवर का प्रॉब्लेम होता है ओ एक चुटकी हल्दी थोड़े गरम पानी  के साथ ले सकते है ये आपको दो घुट पानी  के साथ रोज लेना है इससे आपके लीवर का इंफेकाशन कम  हो जाता है ! हल्दी किसी भी तरह का इन्फेक्शन  कम करती है ! असीडीटी और गैस की वजह से अंदर जखाम टाईप का हो जाता है तो अप हल्दी लेते है तो एसा नहीं की ओ अंदर जाने के बाद जलन नहीं करता बल्कि आपको अच्छा फिल होता है ! हल्दी गरम चीज है लेकिन जब अप उसको लेते है तो ओ अंदर जाने के बाद आपको ठंड महसूस कर देता है ! जिसको यूरीन की प्रॉब्लेम होती है उसको भी हल्दी बहुत फाइदा करता है ! जिसको कोलॉस्टल या ड्राय ग़लीसराईं की प्रॉब्लेम होता है उनको हल्दी का टी लेना चाईये ! जिनको स्किन की प्रॉब्लेम होती है उसको हल्दी का इंटेक और अप्लीकेशन दोनों अच्छा होता है ! इसीलिए हम शादी से पहले हल्दी का उटन बनाते है ताकि सारे कसीं प्रॉब्लेम खतम हो जाए ! अगर आपको भूखार है तो अप कच्ची हल्दी उस करे ड्राय पावडर न ले कच्ची हल्दी को स्लाइसेस मे काटे और बॉइल करके 25 ml हर घंटे पीना है इससे फाइदा होता है ! कच्ची हल्दी या कच्ची अदरक बॉइल करके उतनी गरम नहीं होती जितनी पावडर या पेस्ट गरम होती है ! पिरेड मई हल्दी बहुत इम्पॉर्टन्ट है ! खुजली बहुत होती है एक्सजिमा होता है तो हल्दी की गिरी लेके किसी स्टोन पर घिसे और उसका पेस्ट निकाल के लगाने से बहुत आराम मिलता है ! जिनके पूरी बॉडी मे खुजली होती है ओ गेंदे का फूल और हल्दी पेस्ट  करके लगाने से खुजली कम  हो जाती है ! किडनी का इंफेकशन उसको हल्दी बहुत राहत देती है इसके लिए पावडर नहीं कच्ची हल्दी लेनी चाईये ! जिसको आखों को इन्फेक्श होती है ओ टी बनके पी कसते है ! आपको माइग्रेन या ब्रॉनकाटिक्स अस्थमा है उसको भी हल्दी भेंड़ी और अदरक बहुत मदत करता है ! कच्ची हल्दी बहुत अकटिव इंनगरीडियान्त होती है ! हल्दी और अदरक का टी बहुत कैद करता है ! किसी भी तरह का बॉडी पैन हो उसे कम  करता है ! 5/1 रेशों के हसब से हल्दी और अदरक ले 5 इंच कच्ची हल्दी लेली तो 1 इंच कच्ची अदरक लो उसको छोटे टुकड़ों मे कट लो पेस्ट बना के कड़ीपत्ता और दालचीनी के साथ बॉइल करके लेने से बहुत फाईड होता है ! जिसको कोल्ड का प्रॉब्लेम है ओ पावडर ले सकते है ! जीरा (cumin seeds ) जीरा हमारी खाने का और हमारी स्वास्थ के लिए बहुत फाइदा करता है ! जीरा के तीन प्रकार होते है ! सिम्पल जीरा (cumin seeds ) काला जीरा(black cumin seeds ) और शाही जीरा  (caraway seeds ) होता है ! इमुनीठि को बूस्ट करता है ! किडनी

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फूड प्रोसेस क्या होता है

फूड प्रोसेस क्या होता है खाना हमारी जिंदगिका बहूत बाडा हिस्सा है ! जब इंसान की विकास(evolution) हो रही थि तब इंसान ने आग बनाना सिख लिया उसने देखा की फूड है ओ डेली तो नहीं मिल रहा है तो उसने उसको जादा  दिन रखने के लिए उसमे नमक डालड़ा शुरू किया फ़िर उसने देखा की उसको उबलेंगे या पकाएंगे तो ओ पचाने मे आसान होता है और जादा दिन टिकता है इस तक सब ठीक था ! लेकिन उसके बाद इंसान ने उसको ओर प्रोसेस करके टेस्टी  बनाने की कोशिश की ! इंसान ने जितनी तरक्की करना शुरू की उसकी जिंदग उतनी फास्ट होती गई  अलग अलग आविष्कार करके उसको बेचना सुरू किया और जादा मुनाफा पाने की चक्कर मै उसने बहूत सारे केमिक डालना सुरू किया ! भारत मै पहले जल्दी बनाने वाला फूड था कचोरी समोसा चैट पकोड़े आदि ! लोगों के पास समय कम होने के कारण बाहर का खाना आसान और ट्रेंडी बन गया युवा पीढ़ी को नया स्वाद पसंद आने लगा ! पूरी दुनिया मै किसी को रोटी बानाना नहीं आट भारत मै हर महिलाको रोटी बनाना आटा है हमको सबकुछ आटा है फ़िर भि हम विदेशी खाना खाते है ! भारत की रसोई मै जितनी शोद हुई है उतनी दुनिया की किसी भि देश की रसोई नहीं हुई फ़िर भि हम विदेशी खाना जादा पसंद करते है ! पिज्जा बर्गन पास्ता नूडल्स ये सब विदेशी खाने है विदेशी भारत आते है भारत की सब्जी मसाले हर्ब्स इत्यादी लेकर जाते है ! भारत मै अलग अलग मुल्कोमै अलग अलग तरिको का खाना देखानेको मिलता है ! हर एक जगा का अपने हिसाब से खान होता है ! हमारे पुरवाजोने अपने क्लाइमेट और एनवारर्मेंट के हिसाब से खाना होता था ! घर का खाना ही अपने अप मै मिरीयकल होता था ! घर के खाने मै इतनी वरायटी होती उतनी काही पर देखनेको नहीं मिलती ! भारत का खाना जितना टेस्टि होता है उतनाही हेल्थी होता है ! आज की डेट मै जो फूड जादा तर खाने को पसंद कीये जाते है उसमे जादा परेजरवेटिवे डाले जाते है ताकि लंबे समय तक सुरक्षित रहे आर्टिफिशेल कलर डाले जाते है आकर्षक दिखने के लिए और अलग अलग सिरफ डाले जाते है टेस्ट बढ़ाने के लिए ! फूड को जब प्रोसेस किया जाता है तो फूड का जो बेसिक केमिकल कम्पोजिशन होता है ओ चेंज हो जात है एसा खाना खाने मै बहूत टेस्टि होता है दिखानें मे आकर्षक और बहूत काम समय मै आवेलेबाल होता है ! लिकीन उसमे पोषण नहीं होता ! एसा खाने से हमारे शरीर मै जो गुड बॅकट्रीया होते है ओ काम होने लगते है उसकी वजह से बॅड बॅकट्रीया बाढ जाते है और हमे मोटाफा और दिल की बिमारी होती है अनप्रोसेस फूड ( unprocessed  food ) अनप्रोसेस फूड जीसामे नेचर मे से अवैलेबाल चीज़े हम लोग कंजूम करते है ! सारे ऐनमल जो होते है ओ अनप्रोसेस फूड कंजूम करते है ! हम भि कुच चीज़े जैसे फ्रूट हानी वेजटेबल अनप्रोसेस कंजूम करते है ! फ़्रूड, सब्जी , सलाद , नट्स और शहद इत्यादी का समावेश होता है ! मिनिमम प्रोसेसस फूड  (minimum processed  food )  हमारे घर मै हम फूड को बॉइले करते है फ्राय करते है या फ़िर रोस्ट करते है तो उसे मिनिमम फूड प्रोसेस फूड प्रोसेस कहा जाता है ! खाने की टेस्ट है ओ बढ़ाती है और पचाने मै आसान होते है ! हमारी सेहड़ के लिए अच्छे होते है पचाने मै आसान और न्यूट्रीशन से भरपूर होते है ! डाल,चावल , रोटी , सब्जी  Processed food (प्रोसेसस फ़ूड ) प्रोसेस फूड यानि जो हमार फूड होता है  ऊअकी जो टेस्ट है ओर बढ़ाने के लिए और उसकी सेल्फ लाइफ बढ़कर उसको अच्छा लुक दिया जाता है इसके लिए    उसमे परेजरवेटिव डाला जाता है ! आटा , दही , पनीर , घी , आचार इत्यादी  अल्ट्र प्रोससेस फूड ( ultra processed food )  जब किसी फूड आइटम को लबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसमे परेजरवेटिव डाला जाता है !अलट्रा प्रोसेसे फूड मै नैच्रल फूड को रे किया जाता है किसी ओर फोरम मै य शेफ मै ! इसमे बहूत सारे केमिकल डाले जाते है अपनी टेस्ट को बढ़ाने के लिए ! चिप्स , केचप  आज के समय मै फास्ट फूड खाना एक आदत बन चुकी है लेकिन अपने कभी सोच है ये कितना खतरनाक है हमारी सेहद के लिए ! लेकिन याजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी के चलते हमे फास्ट फूड की ओर चलना पड़ता है ! फास्ट फूड हमारे देश का कल्चर नहीं है ! ओ वेस्टन की ओर से हमारे यहा आया है ! स्वाद कुच समय का होता है लेकिन उसका असर लंबे समय तक भोगना पड़ता है ! स्ट्रेट फूड( street food ) बाजार मै या सड़क के पास ठेले गाड़ी या छोटे-छोटे पर स्टॉल पर जो खाना मिलता है उसे स्ट्रीट फूड कहते है ! फास्ट फूड( fast food ) ऐसा खाना जो बहुत जल्दी तैयार हो जाए, तुरंत मिल जाए और खाने में आसान हो। यह आज की तेज़ जिंदगी (busy lifestyle) का हिस्सा बन चुका है। जंक फूड (junk food ) जकन फूड उसे कहा जाता है जो अपको पक्करत मै उपलब्ध होते है ! पैकेट खोल और तुरत कहना शुरू किया लेकिन उसमे पोषण की मात्र जीरो होती है ! ये आकर्षक दिकते झाई और खाने मै स्वादिष्ट होते है इसीलिए हम उसकी मांग जादा करते है ! आज भारत मै जादा तर लोग मोटापा शुगर बीपी के शिकार होते दिख रहे है ये एक चिंता का विषय है  इसको कंट्रोल करने के लिए हमे हमारे खाने पर विशेष ध्यान देना होगा ! जादा तर घर का खाना खाना चाईये ! जितनी अपनी बॉडी को जरूरत है उतनी मात्र मै पाणि पिना ! अपने माइन्ड को सेट करना है की जो खाना अपनी सेहड़ पर बुरा असर डालता है उसको पहचान ले और उसको कभिभि नहीं खाना जो खाना अपनी सेहड़ के लिए अच्छा नहीं है उसको कभी नहीं खरीदना और उसको अपने घर या किचन मै भि नहीं रखना ! उसके लिए बेहतर दूसरा पर्याय ढूंड़ना  होगा !

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फास्टिंग करने से हमारी बहूत सारी बीमारिया ठीक हो सकती है !

 फास्टिंग करने से हमारी बहूत सारी बीमारिया ठीक हो सकती है ! Any diseases can reverse with fasting हम क्या करते है सुबह का खाना डायजेस्ट  नहीं हुआ और हम सोचते है दुपहर मै क्या खाए  खाने का मतलब ये नहीं की हम पूरा मील ले रहे है लेकिन हम बीच बीच मै कुच सन्याकिंग कर रहे है कुच खा रहे है कुच बिस्कुट या फ़िर कुच नमकीन कहा लिया इसके वजह से हमार वजन भि बढ़ता है और बीमारिया भि होती है ! तो काय करना चाईये वही करना चाईये वही करना चाईये जो पुराने जमाने मै लोग करते थे फास्टिंग ! हम हमारे बॉडी को पूरा दिन खाना देते जाते है और हमारे बॉडी की 80% शक्ति होती है ओ खाना डायजेस्ट  करने मै चली जाती है इसीलिए हमारी जो शक्ति है ओ हमे वजन काम करने मै और बीमारियोसे लढ़ने के लिए मदत नहीं करती ! हम जो खाना खाते है ओ एनरगी मै कंवत होता है हम जो खाना खाते है ओ इसलिए की हम उसका फायदा उठा सके लेकिन क्या होता है हम जो खाना खाते है ओ सेल मै स्टोर होता है और हम उसका ईस्तमाल नहीं करते और ओ फैट बन जाता है ! जब हम फास्ट करते है तो हमारी  बॉडी को समय मिलता है की ओ पस्त का जो फैट स्टोर है इसमे से एनरगी निकाल कर उसका इसेमल करे ! फ़ास्टिंग की वजह से हमार बहूत सर हार्मोलर चेंज होता है ! Intermitter fasting मे हमारे जो इटिंग हैबिट्स है उसे हम दो हीसो मे बात लेते है ! Intermitter fasting कैसे काम करता है आप रोटी चावल या कुच फल खा रहे हो उसके अंदर का जो कार्बोहाड्रेड है ओ कंवट होता है ग्लॉकोज मै और ब्लडस्टेट मे जाता है वहा से इंसुलिन के मद्यम से आपके सेल तक और ऑर्गन तक पहुचट है और ओ अपको एनरगी प्रोवाइड करता है ! जब आप फ़ास्टिंग   करते हो तो आपका बॉडी ग्लॉकोज to ग्लुकोस जो कुनवेत हुव है लीवर के द्वारा ओ जब अपने उस कर लिया तो अब उसके पास एक ही रास्ता है आपका बॉडी फैट बार्न करना शुरू कर देता है !   इटिंग विंडो और फ़ास्टिंग   विंडो फ़ास्टिंग   विंडो इसमे हाम तीन तरह से फस्टिंग कर सकते है ! 16-8 method -इसमे हम दिन के 8 धनते खा सकते है सुबह के 8 से शाम के 6 बजे तक उसके बाद 6 बजे से शुभह के 8 बजे तक सिर्फ पन्नी पीते है ! 1 meal a day इसमे हम दिन मै सिर्फ एक बार खाना खाते है उआसमे हम सिर्फ सुबह का नाश्ता या दोपहर का खाना खाते है ! 5;2 day  इसमे हम एक week मे पाच दिन खाना खाते है और दो दिन फ़ास्टिंग   करते है ! फसीनग करने से हमारे बॉडी मै एक फेनामीन develop होता है जिसको autophagy बोलते है !  autophagy बेसिकली क्या है हमारी बॉडी के सेल्स मै जो टॉक्सीन जमा होते है उनको eat up करना सुरू कर देता है ! जब हम फसीनग करते है तो हमारे बॉडी मै स्टोरेड फैट रेसव है ओ खतम होने के बाद हमारी बॉडी अपने शरीर मै जो टॉक्सीन एकट्टे होते है या जो खरब सेल बने होते है उनको consume करना उनको डाजेस्ट करना शुरू कर देती है ! हम सोचयथे है हमने रात को 9 बजे खाना खाया और 10 या 11 बजे सो गए लेकिन रात को लेट बहूत जादा खाना खाने स के हम सो जाते है लेकिन हमारी बॉडी जगी रहेती है उसको डायजेस्ट  करने मै ! फ़ास्टिंग   करने से हमे बहूत सारे फाइदे  होते है जैसे हमारी immunity boost होती है अपको ऑटो एममुं डिसेसे है उसमे भि अछा परिनम देखाने को मिलता है ! कैंसर के रोगी मै बहूत अच्छे परिणाम   देखाने को मिलते  है ! Intermitter fasting ये जो कॉन्सेप्ट है ओ वेस्टन कलचेर से हमारी ओर आई है ! लेकिन भारत की संसृति है भारत की ओ इतनी रिच है की हमने उस कॉन्सेप्ट को  सदियों से लिखा गया है और सदियोसे इसको आजमाया जाता है ! पहेले हम जब सूरज डूबने के बाद खाना नहीं खाते तो हमारा 16 से 12 घंटे का उपवास हो जाता था ! हमारे पुरानोमे सदियों पहिले एकादशी , अमावस ,करवा चौथ , चतुर्थी , मुसलमनोके के रोज़े और जैन धर्म मे चलिए ये सभ व्रतों के रिवाज थे निर्जला एकादशी ,मौनी अमावस्या ओ इसलिए की हम कुच भि रोज खाना खाते है उससे हमारी  बॉडी सम हो जाएगी बॉडी को उसकी आदत पद जाएगी फ़िर बॉडी नुकसान कर देगी ! कुच लोग सालों से बीपी शुगर की गोली खा रहे है बाद मै कहते है लीवर खराब हो गया किडनी खराब हो गया क्योंकि बॉडी नुकसान कर देती है ! जबह भि मौसम बदले आप उपवास करो और आगले मौसम मे अप बीमार ना पड़े उसकी तयारी करो किसे नहीं करना है फ़ास्टिंग    जीतने भि प्रेग्नेंट फ़ीमेल है या ब्रेस्ट परीडिंग है उसको नहीं करना चाईए डाबेटिस है तो आप डॉक्टर या नटुरोपथ की सलाह लेकर कर सकते है छोटे बच्चे को नहीं करना चाईये बहूत जादा workout करते हो तभी नहीं कर सकते बहूत स्टेस मे हो तभी नहिका सकते कुच इटिंग डिसॉर्डर है नहीं करना चाईये कुच मेडिकल इससु है तभी नहीं करना चाईये अप अन्डर वेट हो आपका वेट स्टगनेट वेट से काम है तभी नहीं करना चाईये उसके अलावा अप फास्ट करो तो आपका बॉडी कुच अलग रिऐक्ट करती है ! अपको मज़ा नहीं आता लेकिन बोला है करने को तो आप करते हो इसका कोही फायदा नहीं ! कोही भि चीज दिल से करनी चाईये हर चीज जरूरी नहीं की सबको सूट करे   गलत तरिकरसे फ़ास्टिंग हम क्या गलती करते है उपवास  कखाते है लेकिन क्या-क्या खाते हो जोकी नहीं खानि चाईये ! खास कर उपवायस मै जादा पाकाा हुआ या जादा ऑइली खाना खाते हो जैसे पकोड़ा, खिचड़ी, चिप्स, चकली, ड्रायफ्रूट, लड्डू और जादा चीनी या दूध का कुछ ये सभ नहीं खाना ! उपवास मै हमे फल ,जूस , नारियल पनि लेना चाईये ! जब भि अप उपवास करते हो उसके बाद आप आप बहूत

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बिमारीयों का मूल कारण हमारी सोंच !

बिमारीयों का मूल कारण हमारी सोंच ! बिमारीयों का मूल कारण हमारी सोंच “जैसा हमारा स्वभाव होता है, वैसा ही हमारा स्वास्थ्य बनता है।” हरि बिमारी सिर्फ बॉडी मै नहीं भावनाओ मे भि होती है हर भवन का हमरे बॉडी के एक एक आंग से रिश्ता होता है ! और हमारी सोच उस अंग पर परिणाम छोड़ जाती है ! हमारे बॉडी मै जोभि चेंजेस हो रहे है ओ एक थॉट प्रोसेस से हो रहे है ! कौनसा इंसान है जो बीमार नहीं होता और कौनसा इंसान है जो ठीक नहीं होना चाहता !  हर कोही बिमारियोंसे  गुजरता है लेकिन उसका कारण जानते है आप ! सबसे पहले कोही भि पीड़ा होती है उसकी शुरुवात दिमाग से होती है ! तो हम अपने विचार पर कैसे नियंत्रण करे ये आना चाईए ! पीड़ा शरीर की होती है कारण मानसिक होता है ! दुनिया मे जितनी भि बिमारिया  होती है उसमे 90% बिमारिया  हमारे थॉट प्रोसेस से होती है ! हमार शरीर प्रकृति ने एसा बनाया की मरते दम तक उसका एक एक कोषाणु अपनी पूरी मॅक्सिम कॅपेसिटी और क्षमता के साथ काम करना चाहता है , अगर अप उसके काम मै बाधा ना डाले तो ओ एक फल की तरह पक कर संसार से अलग होगा  ! आखें मरते दम तक दिखाना चाहती है , इंटेसटाईं पेट साफ करना चाहता है , किडनी फ़िल्टर करना चाहती है लंग्स ऑक्सीगेशन करना चाहता है ! हमारी बॉडी मे ही हीलिंग पावर है लेकिन हम समाधान बाहर ढूंढ रहे है ! हर महीने नई टेस्ट करते है ,हर महीने नए एंजेकटीऑन लगवाते है हर महीने मे गोलीय खरीदते है ! जितनी भि पैथी इस दुनिया मै काम कर रही है ओ सिर्फ सेल्फ हीलिंग पावर की मदत से अगर हम सेल्फ हेयलिंग पावर को हटा दे  तो सब पैथी ज़ीरो है ! अगर हमारे बॉडी मै प्रतिक्रिया करने की क्षमता ही नहीं तो हमरे दवाईया , हार्ब सुपर फूड क्या काम के ! एनर्जी  तो हर व्यक्ति मे हर इंसान मे हर पेड़ पौधों मे होती है ! उसे हम प्राण ऊर्जा कहते है ! उस प्राण ऊर्जा को कमजोर कौन करता है हमारी सोंच हम हर वक्ति कुच निगेटिव डर चिंता धुस्सा तनाव मे रहते है तो हमारी एनर्जी  लो लेवल पर रहेगी हमारे हार्मोन केमेस्ट्री जो करतीजोल बनाकर महरि बॉडी को डैमिज करते रहेंगे क्योंकि महने डेमेजिन फैक्टर को प्रोविगेन कर दिया मेंटली तो हम एनर्जी  को काम कर रहे है !    ये छोटी  छोटी चिजे हमारे बॉडी पर क्या परिणाम छोड़कर जाती है ! बिहेवीयर पटर्न आज की डेट मे बहूत असर डालता है ! तो हमार स्वास्त हमारे बिहेवीयर को निर्भर होता है ! अगर अपको कोही कहता है की मुजे कोही तकलीफ हुई बुखार आया और ये कैंसर होने के सखेत थे फ़िर पता चल की ये कैंसर था जब अपको बुखार आता  है तो हम सोचते है काही मुजे भि कैंसर तो नहीं हुआ सबसे पहेले वही सोचएगे ये जैसेही अपने आपके दिमाग मे विचार डाला तो आपके बॉडी मे ये सेल्स बनाना शुरू हो जाएगा हमारे बॉडी के सेल्स हमारे थॉट प्रससेस से रेलेटेड है ! दुनिया मे जीतने भि बिमारिया  होती है ओ हमारे ईमोशनल थिंकिंग और थॉट प्रोसेसस से होती है ! तो आपका एक छोटासा थॉट एक सेल्स को बदल देता है जो डेसीस सेल नहीं है उसको भि डेसीस सेल्स बना सकता है इतनी ताकत है हमारे सोंच मै  हर बिमारी से नहीं भावनाओ से भि होती है हर भवन का हमरे बॉडी के एक आंग से रिश्ता होता है ! गुस्सा ( anger weakens your liver)  जिस किसी को लीवर की तकलीफ है उसका स्वभाव बहूत ग़ुस्सेवाला होगा , ग़ुस्सा लिवर को कंजोर करता है ! जब चीज़ें हमारी इच्छा के अनुसार नहीं होतीं या हमें चोट/अन्याय महसूस होता है, तो जो तेज़ प्रतिक्रिया आती है उसे गुस्सा कहते हैं। हम हमेशा देखते है की जो इंसान जादा ग़ुस्सा करता है ओ हर बात पर चिड़चिड़ करता है उसके बहूत सारे रिश्ते होते है उसमे दूरी रहेती है हमेश जल्दबाजी मै गलत फैसले लेता है और बाद मै पछतावा करता है ! अपेक्षा पूरी ना होना ,जादा तनाव, थकान या नींद की कमी इसकी वजह से हाय ब्लैड प्रेशर ,सिरदर्द ,दिल की बिमारी से गुजरना पड़ता है ! ग़ुस्से मे  दूसरों की गलती की सजा खुद को देते है ! जो इंसान बहूत गुस्सा करता है हमेशा कविल फैटी लीवर होती है ! दुख  (grief  weakens your lungs)दुख एक प्रभावी भवना है ! हर इंसान को जिंदगी मे कभी ना कभी दुख से गुजरना पड़ता है ! जिदागी मे हमे किसी चीज का भारी नुकसान हो जाता है या कोही अपना हमसे दूर चल जाता है तो हमे बहूत दुख होता है ! हम अपने बहूत करीबी इंसान को खो देते है या हमारे बहूत करीबी हमे धोका देता है तो हमे बहूत जादा दुख होता है ! हम बहूत उदास रहते है ,अकेले रहेन पसंद करते है अपना आत्मविष्यवस काम हो जाता है और नकारात्मक सोंच आती है ! कोही बहूत अकेले राहत है तन्हाई  जिदांगी जीत है उसे सर्दी जुकाम जैसी प्रॉब्लेम होती है क्योंकि grief lungs को कमजोर करता है ! जो बच्चा जादा रोता है हमेश कफ और कोल्ड का शिकार रहेट है ! चिंत्त (warry weakens your stomach) चिंत्त एक एसी मानसिक स्तिथि है जीसमे इंसान बार बार अनेवाले भविष्य के बारे मे या फ़िर कोही समस्य के बारे मे सोचता है ! जिनका स्वभाव बहूत चिंता वाला होता है ,ओ हमेश एक ही बात करते है कया होगा ,कैसे होगा ,अगर एसा हो गया तो  कोही बहूत चिंता मे राहत है उसको स्टामक के प्रॉब्लेम होते है ! जब कोही इंसान डर  (fear weakens your kidney) जब हमे किस चीज से खतरा या नुकसान होने की संभावना पैदा होती है उस स्तिती  को हम डर कहते है ! इंसानको हमेशा असफल होनेका , किसी बिमारी या मौत का डर, बुरे सपनों का डर ,किसी भारी नुकसान का डर , या अपनों का खोने का डर रहेट है इसकी वजह से घबरत पैनिक अटैक की संभावना होती है ! जब बच्चे को कोही बहूत

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फूड कॉम्बिनेशन

फूड कॉम्बिनेशन (food combination  ) हम जो खाना खाते है उसमे कही सारे पोषण तत्व (nutrients)होते है जैसे प्रोटीन ,कार्बोहाड्रेडस , फॅट  ,विटामिन  , मिनरल , फाइबर और पानी ! अपनी बॉडी के हिसाब से हर समय हर तत्व अपना काम करता है ! हर तत्व को काम करने के लिए सही सायोग होना जरूरी होता है ! अगर हमने गलत कॉम्बिनेशन लिया जैसे हमने प्रोटीन के साथ स्टार्च , फल जूस के साथ खाना , दूध के साथ खट्टा , जादा प्रोटीन जादा फैट तो फ़िर खाना पेट मे सड़ेगा !       सही खाना , सही समय पर ,सही कॉम्बिनेशन के साथ लिया जाए तो ओ खाना आपके लिए अमृत समान है ! लेकिन गलत खाना गलत समय पर ,गलत कॉम्बिनेशन से लिया तो वही खाना आपके जहर बन जाता है ! हेल्थी रहने के लिए संतुलित भोजन ले ना बहूत जरुरी होता है ! इसलिए हम अपने डाइट मै दूध, दही, फल , सब्जीया इत्यादी शामिल करते है ! लेकिन ये डाइट मै तभी पोषन देते है जब हम उसे सही कॉम्बिनेशन मे खाए ! अब सवाल ये आता  है की फूड कॉम्बिनेशन लेने की जरुरत क्यों  पड़ी ,पहले क्या था इंसान एक ही तरह खाना खाता था तो बॉडी क्या करती थी की उससे पूरे जूस निकाल कर उसे डाजेस्ट करती थि  तो उस कन्डिशन मे पाचन  मे कोही इशू आया ही नहीं ! लेकिन बहूत  सारे कॉम्बिनेशन हमने मिक्स करना शुरू किये उसके बाद इस्तरह की समस्या ये पैदा होना शुरू हुई अब जनरली दाल ,चावल ,फ्रूट,नट्स दूध मेजर फूड तो यही है बाकी साइड मै फ्रूट सलटस वेजेटेबल यही सभ अब इसमे क्या कम्बाइन करना चाहिए की हमे कभी इंडाजशन की समस्या से उलज़ना नहीं पड़ेगा ! अब सवाल ये पैदा होता है की हम खाना क्यों खाते हो की हमारी बॉडी को मिले , लेकिन मिलने की बजे वही पर वह  जूस कॉन्ट्रास्ट होने के बाद पेट मे सड़ गया फिर आपका खाना क्या कूड़ा हुआ ! बॉडी को एक बार मै एक प्रकार का स्टार्च या प्रोटीन देना चाईए ! हम कैसे पहचाने हम सही खाना खाते हो ! (symptoms ) हम  जब जवान होते है तो हमे पता भि नहीं चलता की इंडिजेट्स क्या है बॉडी सरोंग होती है ! हम एक दो घंटे बाद कुच ना कुच खाते रहेते लेकिन सब डिजेस्ट होता है ! बाद मे आपका मेटाबोलिज़्म थोड़ा खराब होता है ! अपको रेगुरल अपने स्टूल (पॉटी) चेक करना होगा ! अगर आपका खाना सिम्पल कॉम्बिनेशन था तो स्टूल का रंग हल्का भोर होगा ,आकार मुलायम सोसेज जैसा ,असनिसे निकलेगा कोही बद्दू नहीं होगी ! दिन मै एक -दो बार पॉटटी कसने जाओंगे ! अगर अप गलत फूड कॉम्बिनेशन खा करे हो तो बहुत पतली या पानी जैसी पॉटी पॉटी का रंग बहुत काला या लाल होना बहुत बदबूदार या झाग वाली पॉटी दिन मै 2-3 बार से जादा पॉटी  करने जाना ! इसका मतलाभ हम गलत हमारा खाना खाने का तरीका गलत है हमे दिन मै कितनी बार खाना खाना चाहिए और कैसा खान खाना चाहिए ( What kind of food should we eat?)  कहते है जो दिन मै एक बार खाए उसे योगी कहते है , जो दिन मै दो बार खाए उसे भोगी कहते है और जो दिन मै तीन बार खाए उसे रोगी कहते है ! तो हमे किसी ने कहा की अप एक ही बार खाना खाओ अप स्वस्त रहोगे तो क्या होगा ! सबसे पहले हमे जो आदत है पूरे दिन मै पेट टट्ट होने तक खाना खाने की तो दो टाइम का खाना छोड़ देंगे तब देंगे ये सोच ही हमे मर  देंगी ! चलो एक टाइम नहीं दो टाइम खाना खाते है ! रात मै खाना खाएंगे नहीं लेकिन ये सबके बस की बात नहीं ! कुच गिने चुने लोग ही है जो ऐसा कर पाते है बाकी कुच दिन करते है बाद मै छोड़ देते है ! तो हमे क्या करना है हमे ना योगी बनना है ना रोगी बनना है ! हमे तो बनना है निरोगी यानि स्वस्त रहना है  !  *सलाद , फ्रूट और खाना इसके बीच मै काम से काम 20-25 मिनट का अंतर रखे !  *कभी भी  खाने के ऊपर आयोडिन नमक  ना डाले नमक  हमेशा  पका  कर खाना चाहिए !  *दही मै  कभी भी  चीनी या नमक  डालकर ना खाए ( एसा करंने से दही मै जो गुड   बैक्टीरिया होते है ओ मर जाते है !  *बेसन को उबाल कर या स्टीम करके खाना चाईये ! (दही बेसन की कड़ी बहूत हेल्थी होती है)   *बेसन  और चीनी कभी एकसाथ नहीं खाना चाईये !  *कभी भी  खाने मै शहद , गुड या चीनी डालकर ना खाए !  *कभी महीने मे एक दो बार त्योहार पर या किसी खुशी पर मिटाइया फास्ट फ्रूट खा सकते हो          तब हमारी बॉडी कुछ संजोत करती है !  *मटन , मछली , अंडे के साथ कभी भि डेर प्रोडक्ट ( दूध दही घी ,पनीर ना खाए ) ना खाए !  *थंडे , खाने के ऊपर नींबू ना डाले , खाना पकाते वक्त नींबू ना डाले , खाना खाते वक्त नींबू   डाले (दाल मै ) *घी कभी भि 70 डिग्री के ऊपर नहीं गरम करना (हमेशा गरम खाने मे ऊपर से घी डालना ) *रात के खाने मै खट्टा नहीं खाना चाईये ! *सोने से पहले जो खाना खाते हो ओ मसालेदर और ताल हुआ होना चाईये ! *सुबह जितना खाना खाते है उससे आधा खाना रात को खाना चाहिए ! *खाना हमेशा भर पेट नहीं खाना चाईये सिर्फ 70%-75% पेट भरना चाईये ! सुबह का खाना – सुबह का खाना स्टीम किया हुआ हो तो बहूत अच्छा ! सलाद (100-150g )  बिट, खीरा , ताजा नारियल , पनीर ,प्याज लाल /पीली शिमला मिर्च  (काले और सफेद तिल जरूर डालना खासकर थंडी मै ) अंकुर (50g ) (मेथी , चना  ) ,भिगे हुए बादाम, नट्स   फ्रूट (100-150g)  अंगूर, ऑरेंगे, केला, चीकू, आम, सेब , स्ट्रॉबेरी , कीवी  (सभी सीजनल फ़्रूट ) नाश्ता (250-300) पोहा , इडली , रोटी , उपमा , सब्जी , सोयाबी वड़ी , चिकन , अंडे  (अंडा हमेशा हाफ फ्राय या आधा पक हुआ चाईये

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हम जो खाना खाते है ओ पूरी तरह ऑर्गैनिक है क्या !

हम जो खाना खाते है ओ पूरी तरह ऑर्गैनिक है क्या ! Is the food we eat completely organic?” भारत देश मै Malnutrition यानि वह स्थिति है जब शरीर को आवश्यक पोषक तत्व (जैसे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, कैलोरी) सही मात्रा में नहीं मिलते लेकिन अब obesity यानि मोटापा एक चिंता विषय बन चुका है ! हमारा देश नूट्रिशन पर काम कर रहा है , हम भि नूट्रिशन को ध्यान मे रखकर खाना खाते है ! हमारे समाज मै , शहर मै , हमारे पड़ोस मै हम लोगो को देखते है  दावाई के पॅकेट खाकर लोग थक चुके है ! अब ओ हेल्थी खाना खाना चाहते है , और हेल्थी रहना चाहते है ! जो भि खाना बाजार से लाते है अपने और अपने परिवार के हेल्थ के बारे मे जरूर सोचते है ! कोशिस ये करते है की कोही भि पॅकेट फूड या प्रोसेस्ड फूड ना खाए ! जो भि खाना खाए घर पर बनाके खाए नाकी बाहर का ! तभी भि हम स्वस्त क्यों नहीं ! क्योंकि पिछले कुछ सालों मै उसमे काफी बदलाव आ चुका है ! खेती करनेका तरीका बदल चुका है ! लोग अब पारंपरिक पद्धतिसे नहीं बल्कि आधुनिक पद्धतिसे खेती करते है ! मै गाव की बात करती हु अब घरों मे महिला चक्की नहीं चलना चाहती पुरुष मेहनत का  काम नहीं करना चाहते ! जो सायिकाल पर थे ओ मोटरसायिकाल पर आ गए जो पैदल चल रहे थे ओ अब घर पर बैठ गए ! गाव मै जो खेती करने की जो पंरपरा थी ओ भि खतम हो चुकी है ! हम अपना छोड़के पराए पर जादा विश्वास करते है ! अब लोग जैविक / ऑर्गैनिक नहीं बल्कि केमिकल खेती करते है ! हर एक चीज बदल चुकी है ! अब पारंपरिक चीजों की जगा केमिकल और मशीन ने लियि है ! अब सब्जींया उगाने से पहेले यूरिया डाल के सब्जी को जल्दी-जल्दी बढाया जाता है ! फ़िर उसके आस-पास की घास को जलाने के लिए herbicides डालते है , उसके बाद उसपर प्रेसतेड़िस छेड़ता है ताकि कीड़े उनसे दूर रहे ! इस प्रोसेस से उगाई गई सब्जी मे एक अलग चमक होती है , जल्दी खराब नहीं होती ,दिखने मै एक समान होती है लेकिन पोषन थोड़ा काम होता है ! इसीलिए हमे आज सब्जियोंसे ना स्वाद आता है ना सेहद !   ऑर्गैनिक सब्जीया दिखने मे थोड़ी रूठी होती है ! एकसमान नहीं होती ,कोही चमक नहीं होती क्योंकि जैविक खेती मै सब्जींयों पर कोही केमिकल नहीं छिड़काया जाता केवल गोबर या जैविक खतों का इस्तमल करके और कीड़े भागने के लिए चूल्हे की राख और नीम ऑइल का ईस्टेमाल किया जाता है ! इसीलिए सब्जीया अपने दम पर उगती है और पुरा समय लेती है , पकाने और किसी भि घास जलाने की दवैयोंका ईस्टेमाल नहीं किया जाता इसके अलावा मौसमी और देसी फल खाना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि वे प्रकृति के अनुसार शरीर को पोषण देते हैं।      र्ऑर्गनी खेतिक का उद्देश ये  होता है की हर एक उत्पादन शुद्ध और स्वस्थ हो अनाज और सब्जी मे कीड़ा दिखना आम बात है , ओ इस बात का सबूत है की ओ अर्गनीक है ! खतरा हमे कीड़ों से नहीं केमिकल से है ! कीड़ा तो साफ करके निकाल जा सकता है !  सब्जींया काटने पर खुशभू आयेगी बनने पर जल्दी पकेगा और खाने मे बेमिसाल ! इसको जब आप खाएंगे तब अपको समज मे आ जाएग ! आपका मन और आपकी सेहद दोनों अब अच्छे रहने लगे है ! छोटी-मोठी बीमारिया infection सभी को हम धीरे धीरे भूल जाएंगे और सोचेंगे पिछली बार हम बीमार काब पड़े थे !   ऑर्गनीक दाल चावल  (grain pulses ) देसी चावल वे पारंपरिक धान की किस्में होती हैं जो भारत में पुराने समय से प्राकृतिक रूप से उगाई जाती रही हैं। इनका बीज किसान साल-दर-साल खुद संभालकर फिर से बो सकते हैं। इन्हें लोकल या पारंपरिक धान की किस्में भी कहा जाता है स्वाद और खुशबू अच्छी होती है जादा चमक नहीं होती ! लेकिन हमारे सेहड़ के लिए महत्वपूर्ण होती है ! दाल को  घर पर जो पतथर की चक्की होती है उसपर पीस जाता है उसपर कोही पोलिश नहीं लगाया जाता उगाने मे ऑर्गैनिक बीजों का ईस्टेमाल किया जाता इसीलिए ओ थोड़ी साधारण दिखती है उसके दानों का साइज़ एक समान नहीं होता है और थोड़े छिलके भि होते है ! उसमे कीड़ों से बचाने के लिए उसमे लाल मिर्च लवंग या नीम की पत्तीया डाले जाते है लेकिन जल्दी पकती है ! और स्वाद और सेहड़ दोनों होती है ! ऑर्गैनिक सब्जींया फल (fruit vegetables) ऑर्गैनिक सब्जींया जल्दी खराब होती है , एकसमान नहीं होती , जादा बड़ी नहीं होती स्वाद से भरी होती है ! कभी कभी सब्जींयों मे कीड़े होते है दाग या चट्टे होते है, जैसे अदरक गाँठी वाला होता है , गाजर छोटा होता है , करेल बहूत कड़वा , आलू छोटे-छोटे थोड़े डार्क , टमाटर और कुकूम्बर काटने पर पूरे घर मे इसकी खुशभू फैलती है यही उसकी ऑर्गनीक होने की पहचान होती है ! ऑर्गनीक सब्जियोक छिलका पतला हिट है ! ऑर्गैनिक फल जो होते  है उन्हे उगाने के लिए जीवमृत और दश पर्णी अर्क का ईस्टेमाल किया जाता है ! जैसे पपाय ओ छोटा होता है ! सपरचब थोड़े दाग होते है , अंगूर छोटे साल पतली और बहूत मीठे , टरबूजा थोड़ी रेशे होती है  भारत में कई जंगली  फल ऐसे होते हैं जो साल में सिर्फ एक बार मौसम के अनुसार उगते हैं। ये फल प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगते हैं और बहुत पौष्टिक माने जाते हैं। जामुन, बेर, इमली, महुआ, फल ,करोंदा, कैथ, बेल, आंवल,देसी आम , सीताफल और फानस ये फल कुदरत के हिसाब से उगते है ! हर फल मे सीजन के अनुसार गुणधर्म होते है जब गर्मी अनेवाली होती है तब थंडी तासीर वाले फल उगते है अपने आप , और थंडी थंडी के मॉसम मे गरम तासीर के फल उगते है ! देसी मिल्क (organic milk ) ओ गाय जगल मे चरने जाती है और जंगल का घास कहती है । देसी मिल्क ओ गाय या भैस से मिलता है जो दिन

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बहूत सारे बिमारीयों का कारण पानी  पीने का गलत तरीका !

Many diseases are caused by drinking water the wrong way बहूत सारे बिमारीयों का कारण पानी  पीने का गलत तरीका ! Many diseases are caused by drinking water the wrong way.     हम सोचते है हम हेल्थी खाना खाते  है , बहूत सरा पानी  पीत है , थोड़ी कसरत करते है फ़िरभि हम स्वस्त क्यों नहीं ? उसका कारण है बहूत सारे लोग इसीलिए बिमार  है की ओ खाना खाने के बीच पानी  पीते है , कुच लोग खाना खा के उठ लिया और पानी पिया , कुछ लोग खाना खाने के पहिले एक ग्लास पानी  पिया फ़िर खाना खा लिया ! ये आपकी गलती है आप पकडले !    आधे  व्यक्ति को आप बिमार इसिलिया देखेंगे की पानी पी लिया और तुरंत चाय या गरम कॉफी पिली ! कुछ लोग थककर आए दैडकार आये और पानी पिलिया , फ्रिज से निकाल और पानी पि लिया , जल्दी -जल्दी मे पानी  पि लिया इसंमेसे कोही आदत आपकी है तो आप बिमारियोंको निमंत्रण दे रहे हो !           हर किसी की बीड़ी के हिसाब से पानी  पिन चाहिए   हमारे शरीर मे 60-65%(adult Male body) और 52-55%(adult Female body) इतना पानी  होता है आगर आप हेल्थी है तो ! उसने भि हर किसी का बॉडी अलग होता है और हर किसी का ब्लड ग्रुप अलग-अलग ढंग से रिअॅक्ट करता है ! हमारी बॉडी को  जितनी पानी की जरूरत है उसमे आप आधी जरूरत फल ,जूस,सब्जी ,चाय कॉफी से पूरी कर सकते हो ! क्योंको जितनी जरूरत है उतना पानी हम नहीं पि सकते !      Blood group A (+) (-) ऊसके पास बहूत सारी बाधि होती है तो वह 1-1.5 लीटर पानी पि सकते है उससे जादा पानी  नहीं पि सकते बाकी 1 लीटर पानी  भोजन ( जूस ,फल ,सब्जी ,ग्रीन टी ) से पूरा कर सकते हो !       Blood group B (+) (-) उसको बहूत अॅसिडीटी की प्रॉब्लेम होती है , तो ओ 2 लीटर पानी  और बाकी (ग्रीन टी ,ग्रीन जूस ,फल ,सब्जी ) ले सकते है Blood group AB (+) (-) बहूत कंफूस ब्लड ग्रुप होता है वह कभी 1 लीटर भि पानी  पि सकता है कभी 800 ml मे भि उसका हो जाता है कभी उसको 2 लीटर की भि जरूरत पड़ती है ! Blood group O (+) (-) इन लोगोक का मेटाबोलिस्म काफी मजबूत होता है 1.5 लीटर पानी (ग्रीन टी ,ग्रीन juse ,सब्जी ,फल ) ले सकते है   अप क्या खा रहे हो इसपर भि पानी पिना डिपेंड रहेता है ! अपने बहूत सारी चीनी (मिठाईया , कैन्डी , चॉकलेट) , कोल्ड ड्रिंक , आईस्क्रीम खानेके बाद आप जादा पानी  नहीं पि सकते ! आप प्रोटीन सौरस खा रहे हो उसके बाद आप जादा पानी  नहीं पि सकते ! अपने बहूत ताली हुई चीज खाई है तो अपको बहूत प्यास लगती है !      पानी  अपने अप मे एक औषधि है ,आगर उसको पीने का सही तरीला और सही टाइमिंग हमे पता हो ! जितना तेज पानी पियेंगे उतना तेज पानी यूरिन के थ्रू बाहर फेकती है ! जितना सिफ़ -सिफ़ करके पानी  पियेंगे उतना उसमे मैजुद न्यूट्रीयंस को अपनी बॉडी एबजोंर्ब करती है ! एसिलिए हमारे पूर्वजोने कहा है खाने को पानी बनके खाए चबा -चबा के और पानी  को खाना समजके आराम से पिये ! अगर अपने पानी  एक साथ गटक के पिया तो अपेन्डिस , हर्निया , हाइड्रोसिल और किडनी के बहूत सारे इशूज जरूर होंगे ! इसका मतलाभ पानी  हमे गरम दूध या चाय की तरह धीरे धीरे पिना चाहिए ! पानी को पूरे २ सेकंड के लिए मुँह  मे घूमाना ताकि जो मुँह ह मे से जो लाड़ है ओ पानी मे मिक्स होजाये ! कभी भि खड़े होकर पानी नहीं पिना  चाहिए  ! प्लास्टिक मे पानी  कभी नहीं पिन चाहिए  पानी  हमेशा काच या कॉपर फ़िर स्टील मे पिना चाहिए  ! बहूत सारे लोग मुँह  से हटा कर ऊपर से पानी  पीते है ये सही तरीका नहीं ! वैसा करनेसे से पानी  के साथ हवा भि अंदर चली जाती है !प्लास्टिक की बोतल मे जो पानी  पीते है वह बिल्कुल डेड वाटर है !  हम जो पानी पीते है उस पानी H2O केमिकल फार्मूला  है ! लेकीन  हमारे बॉडी मे जाने के बाद उसका फार्मूला चेंज हो है !  पानी  कब पिना चाहिये ? कुच लोगों का ऐसा होता है , जब मर्जी हो तब पानी पिलो , जितना मर्जी पानी पिलो , जैसा चाहे उस तरिकेसे पानी  पिलो पानी तो है क्या होगा पर नहीं ! हमारे मल ,मूत्र और पसीने के जरिए 2 -1.5 लीटर पानी  बाहर निकलता है ! तो जो लोग बहूत मेहनत का  काम करते है बहूत फिजिकल अॅक्तिविटी करते है उन्हे जादा पसीना आता है ओ लोग जादा से जादा 4 लीटर पानी  पि सकते है लेकिन जिन्ह लोगों को पसीना काम आता ओ लोंग दो लीटर के आसपास पानी  पि सक्ते है उससे जादा नहीं । लेकिन हमे 1.5 लीटर से  काम पानी  नहीं पिना चाहिए  कम पानी  अपने बॉडी को डीहाड्रेड कर देंगा ! पानी की कमी है ! हमारे शरीर मे वह हमारे यूरिन के कलर से हमे पता चलता है ! की हमारे शरीर मे पानी  कम है या जादा ! अगर हम 4 लीटर से जादा पानी पिये तो ये बहूत बड़ी दिक्कत का कारण हो सकता है ! पानी  हमेशा पिरामिड शेफ मे पिन चाहिए  जैसे जैसे दिन ढलता है वैसे पानी  पीने की मात्र काम करनी चाहिए       पानी कब नहीं पिना चाहिए   खाना खाने से पहले पानी नहीं पि सकते पानी पिलो उसके 30-40 मिनिट बाद खाना खाले खाना खाने के बीच पानी  नहीं पिना अगर जरूरत पड़े तो एक घुट पानी  पिलो खाना खाने के तुरंत बाद पानी नहीं पि सकते खाना खाने के कम से कम 45 मिनट बाद पानी पि सकते हो सुबह उठातेही थोड़ा गुनगुना पानी अपको पिना चाहिए , सुबह उठातेही पानी  पिने से रात भर की पानी  की कमी पूरी हो जाती है आगर अपको रात को नींद प्यास लगे तो सिर्फ एक घुट पानी  पीकर सो जाईये  ! हमारे बॉडी  का Ph बैलन्स 7-9 के बीच होना चाहिए  ! पैकेट बोतल के पानी  का Ph 6.5

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नैटुरोपैथी क्या होती है ? what is naturopathy ?

नैटुरोपैथी  क्या है ? what is naturopathy नैटुरोपैथी  एक ड्रगलेस थेरफी है! नैटुरोपैथी एक ड्रगलेस थेरपी है ,जिसमे बिना मेडिसिन के शरीर  का इलाज किया जाता है ! आज हम देखते है जैसे -जैसे मॉडर्न टेक्कनॉलॉजी आगे बढ़ रही है , हमारी दुनिया उतनीही  अड्वान्स होती जा रही है ! मेडिसिन का वापर बढ़ता जा रहा है,पर ये सही बात नाही है, मेडिसिन बिमारीको दबा देती है, पूरी तरह से जड़ से नाही निकलती. लेकिन नैटुरोपैथी  बीमारिके जड़ तक जाके उसके कारण को समज कर उसका उपचार करता है! नैटुरोपैथी  एक ऐसी प्याथी है ,जो कहती है आहार ही औषध है !  सही आहार ,सही टाईम ,सही मात्र मै, सही कॉम्बिनेशन के साथ लिया जाए तो आहार आपके लिए औषधि है !  नैटुरोपैथी  यही कहता है हमार जो शरीर होता जो की पाच तत्व (मिट्टी ,पानी  ,धूप ,हवा ,आकाश )से बना है ! इसके पास शरीर को ठीक करने की इतनी शक्ति होती है, जो हमारे शरीर को ठीक कर सकती है ! अब नेचर ने हमारी बॉडी का मेटाबॉलिज्म इतना अड्वान्स बनाया है की ,हम जब खाना खाते है , ओ खाना पेट मे जाता है  पेट मे से अंत जाता है  वहा  खाना पचाता है, अंत मे से पोषण तत्व शोषण करके  उसके बाद खून मे जाकर और पूरे शरीर मे सप्लाय होता है ! अब नेचर ने हमारी बॉडी का मेटापोलिसम  इतना अड्वान्स बनाया है, तो उसके पास उसको ठीक करने की भि शक्ति जरूर होगी !  पर हम इसको समजनेमेही भूल करते है ! नैटुरोपैथी  यही कहता हे की हमारा शरीर है इसके पास इतनी ताकत है की  जब हम बीमार पड़ते है तो हमारा शरीर ही उसको ठीक करता है, हम उसका लाभ जरूर उठाए!    बहूत सारी पैथी होती है ! जैसे होम्योपैथी , एलोपैथी (आधुनिक चिकित्सा), आयुर्वेदा ,योग लेकिन हर एक पैथी   का अपना -आपण तरीका होता इसिलिया हर एक पैथी  का ट्रीट करने का तरिका आलग होता है ,हर किसी का शरीर अलग होता है ,हर किसी की पाचन शक्ति अलग होती है ! काढ़ा पीना, कच्चा खाना खाना, या सिर्फ कुच हार्भ औषधि लेना या योग करना  मतलाभ  नैटुरोपैथी  नहीं ! नैटुरोपैथी  के प्रमुख पाच तत्व (element ) नैटुरोपैथी  एक तपस्या है ! इसमे जो पाच तत्व है वह हमारे लिए पाच प्रकार के भोजन समान है ! जैसे हमारा शरीर भोजन के बिना नहीं रह सकता वैसे इन पाच तत्व की कमी से हमारी प्रकृति मे भिघाड़ आता है ! हमार शरीर (मिट्टी ,जल ,अग्नि ,वायू ,आकाश ) इन पाच तत्व से बना है ,और इन पाच तत्व का हमारे शरीर के सभी अंगों से संबंध होता है ! हमारे शरीर मे जितना भि खाली जगह है  जैसे मुह ,कान ,नाक ,पेट छाती  और कोशिकाओ के बीच खाली जगह!  !  उसको आकाश तत्व कहते है ! हमारे शरीर मै जीतने भि खाली हिस्से है उन्हे विध्यमान करना आकाश तत्व का काम है ! हम क्या करते है ! हमारी गलत दिनचर्या या गलत खान-पान की वज से उस खाली जगा को भर देते है, या उसको बंद कर देते है ! आकाश तत्व की कमी से हमारे शरीर मे मानसिक और शारीरिक प्रभाव पड़ता है , तनाव ,असंतोष ,अकेलापन ,वात दोष , सिरदर्द बढ़ सकता है ! उपवास या हल्का भोजन करने से आकाश तत्व सक्रिय होता है, जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं और पाचन शक्ति सुधरती है! ध्यान मौन मुद्रा उपवास हल्का भोजन आदि अपना सकते है !   सुबह की धूप और हवा घर में आने दें, खिड़कियां खोलें!   घर में विंड चाइम्स (पवन घंटी) लगाएं!   ध्यान (meditation) और शांत वातावरण में समय बिताएं!   सूर्योदय के समय आकाश की ओर देखकर आभार व्यक्त करें!   हमारे शरीर मे जो श्वसन प्रक्रिया चलती है ओ वायू द्वारा चलती है ! जैसे सास लेना सास छोड़ना होता है ! हमारे शरीर मे सास लेने मे और छोड़ने मे दिक्कत वायू तत्व की कमी होने से होती है  ! ये तत्व अदृश है लेकिन हमारे शरीर के लिए बहूत आवश्यक है ! हमारे शरीर की हर प्रकार की गति वायू तत्व से होती है ! हमारे शरीर मे  फेफड़ो और हृदय को ठीक से काम करनेमे मदत करता है ! तत्व की कमी से शरीर मे भारीपन जोड़ों मे वायू अकड़न या दर्द ,पाचन सम्बधी समस्य आती है प्राणायाम और गहरी श्वास ले खुली हवा में टहलना हल्का और सुपाच्य भोजन नियमित दिनचर्या हमारे शरीर मे जो अग्नि तत्व भूख और प्यास को नियंत्रित करता है ! भोजन पचानेक काम करता है ! भोजन मे से पोशाक तत्व निकाल के उसे ऊर्जा मे बदलता  है ! शरीर को उष्णता प्रदान करता है ! कोशिकां की निर्मिती करता है, उससे हमारे शरीर को प्रतिकारक शक्ति प्राप्त होती है ! बुद्धि की सक्षमता बढ़ती है , तर्कशक्ति और यदश बढ़ती है ! हमारी दृष्टि तेज रहती है ! अग्नि तत्व कमी से मंदी पाचन ,अपच ,कब्ज ,त्वचा का रंग फीका पड़ना ,चिड़चिड़ापन आदि समस्य उढ़भवती है ! और अग्नि की अधिकता से जलन महसूस होना , अत्यधिक पसीना,एसिडिटी ,पित्त विकार अत्यधिक पसीना बेचान होना आदि समस्य होती है ! एससे काम करने के लिए थंडा भोजन ,कड़वी सबज़्जीया  और शांत वातावरण चाहिए !   संतुलित और ताजा भोजन   सुबह की हल्की धूप   नियमित दिनचर्या   प्राणायाम और ध्यान हमारे शरीर मै70% पानी  है ! औरपानी  हमारे शरीर का आधार है! पानी  हमारे शरीर के तापमानको नियंत्रित करता है ! हमारे शरीर मे तरलता और परिवहन लता है ! पानी  की  वजा से हमारे शरीर मे नमी   बनाई रहती है ! पानी  की माध्यम से शरीर मे पोशाक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचता है !    दिनभर में 7–8 गिलास या शरीर की जरूरत अनुसार पानी पिएँ   नारियल पानी, नींबू पानी लें   तरबूज, खीरा जैसे जलयुक्त फल खाएँ   सुबह खाली पेट गुनगुना पानी   धूप में जाने से पहले पानी जरूर पिएँ   शरीर मे दांत, हड्डी ,मासपेशिया ,नाखून   आदि की निर्मिती करके उन्हे सहाय्य करता है ! हमारे शरीर मे स्तिरता और ताकत लता है ! पृथ्वी तत्व की कमी से  बहुत ज्यादा उपवास या कम भोजन पोषक तत्वों की कमी अधिक तनाव नींद की कमी अत्यधिक

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